भारत की अर्थव्यवस्था ने वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच अपनी मजबूत विकास गति बनाए रखी है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के दौरान देश की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (Real GDP) वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह दर 6.9 प्रतिशत थी।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने आज वित्त वर्ष की पहली तिमाही के लिए GDP के तिमाही अनुमान जारी किए। मंत्रालय के अनुसार, मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में नाममात्र GDP में 10.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

मंत्रालय के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग ने कहा कि अर्थव्यवस्था के सभी प्रमुख क्षेत्रों में वृद्धि सकारात्मक रही है। यह दर्शाता है कि सरकार की नीतिगत पहलों और हस्तक्षेपों का अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों और भू-राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव के बावजूद भारत ने सकारात्मक विकास दर बनाए रखी है।

उन्होंने बताया कि सेवा क्षेत्र का प्रदर्शन विशेष रूप से मजबूत रहा। इसके अलावा वित्तीय, आवास और रियल एस्टेट क्षेत्रों ने भी अर्थव्यवस्था की वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

मंत्रालय के अनुसार, पहली तिमाही में वास्तविक सकल मूल्य वर्धन (Real GVA) में 8.2 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है, जबकि नाममात्र GVA में 11.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

स्थिर कीमतों पर तृतीयक क्षेत्र में 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस वृद्धि में वित्तीय सेवाओं, रियल एस्टेट, सूचना प्रौद्योगिकी और पेशेवर सेवाओं की अहम भूमिका रही, जिनमें कुल मिलाकर 12.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

वहीं, स्थिर कीमतों पर द्वितीयक क्षेत्र ने 8.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। प्राथमिक क्षेत्र की वृद्धि दर 2.9 प्रतिशत रही। इसमें कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिसने पहली तिमाही में 3.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।

मंत्रालय के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक और भू-राजनीतिक दबावों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत मजबूत वृद्धि के साथ की है।

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