प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर महर्षि वाल्मीकि रचित ‘वाल्मीकि रामायण’ के अरण्यकांड का एक विशेष संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है। इस श्लोक के माध्यम से भगवान श्रीराम के दिव्य चरित्र, सत्य और शौर्य के साक्षात् स्वरूप का वर्णन किया गया है।

पीएम मोदी द्वारा साझा किए गए ‘वाल्मीकि रामायण’ (अरण्यकांड, 37वां सर्ग, 13वां श्लोक) के अनुसार- “रामो विग्रहवान् धर्मस्साधुस्सत्यपराक्रमः। राजा सर्वस्य लोकस्य देवानां मघवानिव॥” इस श्लोक का भावार्थ है कि भगवान श्रीराम स्वयं धर्म का साक्षात रूप हैं। वे सज्जनों के परम आश्रय हैं, अपने संकल्पों पर अडिग रहते हैं तथा सत्य और शौर्य के प्रति दृढ़ रहते हैं। वे संपूर्ण ब्रह्मांड के रक्षक हैं।

अरण्यकांड के इस प्रसंग में जब राक्षसों के अत्याचार से वनों में रहने वाले साधु-संत पीड़ित थे, तब श्रीराम ने उनके दुखों को दूर कर धर्म की स्थापना का संकल्प लिया था। यह श्लोक दर्शाता है कि धर्म केवल कोई सिद्धांत नहीं, बल्कि श्रीराम के आचरण और जीवन में साक्षात प्रकट हुआ है, जो हर परिस्थिति में केवल धर्म का ही पालन करते हैं।

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